गुरुवार, 22 मार्च 2018

0 लाख तक ग्रेच्युटी पर टैक्स नहीं* *ग्रेच्युटी भुगतान संशोधन विधेयक राज्यसभा में ध्वनिमत से पारित*

*20 लाख तक ग्रेच्युटी पर टैक्स नहीं*

*ग्रेच्युटी भुगतान संशोधन विधेयक राज्यसभा में ध्वनिमत से पारित*

नई दिल्ली : संसद ने ग्रेच्युटी भुगतान संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। पिछले सप्ताह लोकसभा से पारित होने के बाद गुरुवार को राज्यसभा ने भी इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया। इससे संगठित क्षेत्र के तमाम कर्मचारी 20 लाख रुपये तक करमुक्त ग्रेच्युटी प्राप्त करने के हकदार हो जाएंगे। पहले यह सीमा 10 लाख रुपये थी। यही नहीं, भविष्य में सरकार को ग्रेच्युटी सीमा बढ़ाने के लिए हर बार कानून में संशोधन की जरूरत नहीं पड़ेगी।

गुरुवार को श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने ग्रेच्युटी भुगतान (संशोधन) विधेयक राज्यसभा में पेश किया। सदस्यों ने कई दिनों से जारी गतिरोध के बीच इसे ध्वनिमत से पारित भी कर दिया। हालांकि उसके बाद हंगामे के चलते सभापति वेंकैया नायडू को सदन की कार्यवाही शुक्रवार तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।

ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 के तहत लगातार पांच वर्ष तक नौकरी करने वाला कर्मचारी नौकरी समाप्त होने पर ग्रेच्युटी प्राप्त करने का हकदार होता है। महिला कर्मियों के मामले में ग्रेच्युटी बिल में सतत सेवा या लगातार नौकरी की गणना के लिए सरकार को मातृत्व अवकाश की अवधि अधिसूचित करने तथा महिला कर्मचारियों की ग्रेच्युटी राशि तय करने का अधिकार भी दिया गया है।

ऐसे की जाती है गणना

ग्रेच्युटी की गणना नौकरी के वर्षो तथा अंतिम वेतन के आधार पर एक फामरूले के अनुसार की जाती है। इसके अनुसार प्रत्येक वर्ष की नौकरी पर 15 दिन के वेतन के बराबर ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाता है।गुरुवार को राज्यसभा में हंगामा करते विपक्षी दलों के सदस्य।

आ सकता है नया आयकर कानून बिल

जीएसटी लागू कर देश की परोक्ष कर व्यवस्था को बदलने के बाद सरकार ने अब नया आयकर कानून लाने की दिशा में कोशिशें तेज कर दी हैं। माना जा रहा है कि संसद के मानसून सत्र में नए प्रत्यक्ष कर कानून के लिए विधेयक पेश किया जा सकता है। नए आयकर कानून में मध्यम वर्ग और उद्योग जगत को राहत मिलने के भी आसार हैं। सूत्रों ने कहा कि सरकार ने नए प्रत्यक्ष कर कानून का मसौदा तैयार करने के लिए जिस टास्क फोर्स का गठन किया था, उसने एक शुरुआती खाका तैयार कर लिया है।टास्कफोर्स 31 मई 2018 तक इस विधेयक का मसौदा तैयार कर वित्त मंत्रलय को सौंप देगी।

सुषमा के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के खिलाफ कांग्रेस सांसदों ने गुरुवार को रास में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया। आरोप है कि मोसुल में मारे गए 39 भारतीयों के बारे में मंत्री ने गुमराह किया।

लेबल:

मंगलवार, 20 मार्च 2018

सुप्रीम कोर्ट~SC/ST एक्‍ट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, नहीं होगी गिरफ्तारी, जमानत भी संभव*

*THANKS सुप्रीम कोर्ट~SC/ST एक्‍ट पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, नहीं होगी गिरफ्तारी, जमानत भी संभव*

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत अपराध में सुप्रीम कोर्ट ने नए दिशा निर्देश दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस तरह के मामलों में अब कोई ऑटोमैटिक गिरफ्तारी नहीं होगी.

इतना ही नहीं गिरफ्तारी से पहले आरोपों की जांच जरूरी है. गिरफ्तारी से पहले जमानत दी जा सकती है.

सुप्रीम कोर्ट ने माना इस एक्ट का दुरुपयोग हो रहा है और केस दर्ज करने से पहले DSP स्तर का पुलिस अधिकारी प्रारंभिक जांच करेगा.

इस मामले में अग्रिम जमानत पर भी कोई संपूर्ण रोक नहीं है. किसी सरकारी अफसर की गिरफ्तारी से पहले उसके उच्चाधिकारी से अनुमति जरूरी होगी.महाराष्ट्र की एक याचिका पर ये अहम फैसला आया है.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और एमिक्स क्यूरी अमरेंद्र शरण की दलीलों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. बेंच ने इस दौरान कुछ सवाल उठाए थे.

क्या अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के लिए प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपाय किए जा सकते हैं ताकि बाहरी तरीकों का इस्तेमाल ना हो?

क्या किसी भी एकतरफा आरोप के कारण आधिकारिक क्षमता में अधिकारियों पर मुकदमा चलाया जा सकता है और यदि इस तरह के आरोपों को झूठा माना जाए तो ऐसे दुरुपयोगों के खिलाफ क्या सुरक्षा उपलब्ध है?

क्या अग्रिम जमानत न होने की वर्तमान प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उचित प्रक्रिया है।

धन्यवाद

प्रहलाद सिंह डांगरा