शनिवार, 21 मार्च 2015

Guest teacher bharti news

सुरेश कुमार जी: 1. गेस्ट टीचर्स की नियुक्ति DSE के पत्र 29-11-2005 द्वारा सिर्फ 3 महीने के लिए हुई थी I

2. गेस्ट टीचर्स की नियुक्ति के लिए कोई विज्ञापन नहीं दिया गया जोकि भारत के संविधान में वर्णित समानता के मौलिक अधिकार का हनन है यानि गेस्ट टीचर्स की नियुक्ति ही असंवैधानिक है और भारत के संविधान की अवहेलना करके कोई भी राज्य सरकार या भारत सरकार कोई भी काम नहीं कर सकती फिर गेस्ट टीचर्स को नियमित करना कैसे संभव है ?

3. शिक्षा विभाग से मिली RTI के जबाब के अनुसार गेस्ट टीचर्स भर्ती में आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं था जिस कारण से आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों का हक़ छिना गया और इसी हक़ के लिए SC और BC के उम्मीदवार कुमारी शैलजा से मिले थे तथा कुमारी शैलजा ने 10 जनवरी 2006 को हरियाणा के मुख्मंत्री श्री भूपेंदर सिंह हूडा को पत्र लिखा था लेकिन हूडा साहब ने SC और BC के उम्मीदवारों का हक़ नहीं दिया I

4. हरियाणा के मुख्मंत्रीश्री भूपेंदर सिंह हूडा के आदेश अनुसार शिक्षा विभाग की विज्ञापन संख्या 1/2005 की मेरिट लिस्ट को दबाकर असवैंधानिक रूप से गेस्ट टीचर्स लगाए गए I लिस्ट बदलने के आरोप में हरियाणा के पूर्व मुख्मंत्री श्री ओमप्रकाश चौटाला को जेल हुई है तो हरियाणा के पूर्व मुख्मंत्रीश्री भूपेंदर सिंह हूडा को लिस्ट बदलने के आरोप में जेल क्यों नहीं होनी चाहिए ?

5. गेस्ट टीचर्स ने 2007 में कई याचिका हाईकोर्ट में डालकर मांग की थी कि उन्हें नियमित शिक्षकों के समान वेतन दिया जाये और नियमित शिक्षक आने तक उन्हें सेवा में रखा जाये जिसका फैंसला हाईकोर्ट ने CWP No. 387/2007 में 30-8-2007 को दिया था और साफ कर दिया था कि न तो समान वेतन दिया जा सकता है और न ही नियमित शिक्षक आने तक सेवा में रखा जा सकता है यानि सरकार जब चाहे उनकी सेवा समाप्त कर सकती है I सोचने की बात है कि गेस्ट टीचर्स ने हाईकोर्ट के इस फैंसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती क्यों नहीं दी और अगर चनौती दी थी तो उसका क्या हुआ ?

6. CWP No. 6090/2010 में हाईकोर्ट ने 30 मार्च 2011 को दिए फैंसले में साफ लिख दिया था कि 31 मार्च 2012 के बाद गेस्ट टीचर्स की सेवा समाप्त और हरियाणा सरकार किसी भी हालत में इनकी सेवा आगे नहीं बढ़ा सकती I

7. CWP No. 6090/2010 में हाईकोर्ट मार्च 2011 में वित्युक्त शिक्षा विभाग द्वारा दिए गए अल्फनामे के अनुसार 7 अप्रैल 2011 को हरियाणा सरकार ने HTET की परीक्षा के लिए फॉर्म बेचने की अनुमति देनी थी तथा जून में HTET की परीक्षा लेकर 31 दिम्बर 2011 तक 25 हजार नियमित शिक्षकों की भर्ती करनी थी और 1 अप्रैल 2012 को 25 हजार नियमित शिक्षकों सरकारी स्कूलों में नियुक्ति देनी थी लेकिन हरियाणा सरकार ने 17 जुलाई 2011 तक भी HTET लेने के लिए अनुमति नहीं दी ज्सिकी खबर बनवाई और वह 20 जुलाई 2011 को पंजाब केसरी (हिसार वाला) के मुख्य अखबार के पेज नम्बर 3 पर छपी थी I खबर छापते ही सरकार ने अनुमति दे दी थी और 24 व 25 सितम्बर 2011 को HTET की परीक्षा लेने की तारीख तय की लेकिन हरियाणा सरकार ने फिर चाल चली और HTET की परीक्षा की तारीख 5 व 6 नवम्बर कर दी तथा दिसम्बर 2011 25 हजार नियमित शिक्षकों की बहती तो दूर विज्ञापन तक नहीं दिया I

8. मार्च 2012 में CWP No. 6090/2010 की अवमानना का केस हाईकोर्ट में डाला गया और सरकार ने हाईकोर्ट को गुमराह करने की कोशिश लेकिन हाईकोर्ट सच जनता था इसीलिए हरियाणा सरकार द्वारा 322 और दिनों नियमित भर्ती के अल्फ्नामे को ठुकरा दिया तथा 31 मार्च 2012 को गेस्ट टीचर्स की सेवा समाप्त करने का आदेश दिया लेकिन अगली सुनवाई पर हरियाणा सरकार 322 दिन का अल्फ्नमा तो स्वीकार कर लिया लेकिन गेस्ट टीचर्स के लिए CWP No. 6090/2010 का ही फैसला लागु रखा तथा 20 मार्च 2012 को CWP No. 7121/2010 का फैंसला दिया I 9. 30 मार्च 2012 को हरियाणा सरकार ने सुप्रीमकोर्ट में झूठों का पुलिंदा बांदकर कहा कि हाईकोर्ट ने 322 दिनों में नियमित शिक्षकों की भर्ती का अल्फ्नमा तो स्वीकार कर लिया लेकिन गेस्ट टीचर्स को हटाने के आदेश दे दिए हैं और अगर गेस्ट टीचर्स को हटाते हैं तो बच्चों की पढ़ाई बाधित होगी जिस पर सुप्रीमकोर्ट कहा कि बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए तथा हरियाणा सरकार को निर्देश दिए कि 322 दिनों में भर्ती करो और तबी तक गेस्ट टीचर्स को सेवा में रखो I

10. सुप्रीमकोर्ट के डर से हरियाणा सरकार ने HSTSB द्वारा बहुत ही तेज गति के साथ भर्ती शुरू की लेकिन इसी बीच बंसल साहब हरियाणा सरकार की मदद के लिए आगे आये और HSTSB को ही भंग करने का केस उस समय डाला जब 12 विषयों के पीजीटी के परिणाम घोषित किए जा चुके थे और हाईकोर्ट ने सिर्फ बचे हुए परिणाम पर ही रोक लगाई थी लेकिन हरियाणा सरकार उन पीजीटी को भी जोइनिंग नहीं दी

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