संज्ञा किसे कहते हैं? उसके कितने भेद हैं?
संज्ञा
प्र01 संज्ञा किसे कहते हैं?
30 संज्ञा का शाब्दिक अर्थ है- नाम। किसी भी वस्तु, स्थान, प्राणी या भाव के नाम का बोध कराने वाले शब्दों को 'संज्ञा' कहते हैं। जैसे राम, हिमालय, गुलाब आदि।
संज्ञा
प्र02 संज्ञा को मुख्यतः कितने भागों में बाँटा गया है? संक्षेप में लिखिए।
30 संज्ञा को मुख्यतः तीन भागों में बाँटा गया है:
व्यक्तिवाचक संज्ञा
व्यक्तिवाचक संज्ञा जिन शब्दों से किसी विशेष व्यक्ति, स्थान, वस्तु आदि के नाम का बोध हो, उन्हें व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं,
जैसे:-
1. राम, सीता, मोहन आदि व्यक्तियों के नाम हैं।
2. भारत, श्रीलंका, करनाल आदि स्थानों के नाम हैं।
3. हिमालय, कैलाश आदि पर्वतों के नाम हैं।
4. गंगा, यमुना, सरस्वती आदि नदियों के नाम हैं।
जातिवाचक संज्ञा
जातिवाचक संज्ञा जिन शब्दों से किसी जाति के सभी पदार्थों और प्राणियों का बोध हो, उन्हें जातिवाचक संज्ञा कहते हैं,
जैसे:-
1. घोड़ा, गाय, शेर, कोयल, मोर आदि पशु-पक्षियों के नाम हैं।
2. आम, केला, गुलाब, कमल आदि फल-फूलों के नाम हैं।
3. पर्वत, नदी, पुस्तक, पैन, घड़ी आदि वस्तुओं के नाम हैं।
जातिवाचक संज्ञा के दो उपभेद हैं
द्रव्यवाचकः- जिन शब्दों से किसी धातु अथवा द्रव्य का बोध हो, उन्हें द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं,
जैसे सोना, चाँदी, लोहा, पानी, तेल आदि।
समूहवाचक संज्ञा
समूहवाचकः- जिन शब्दों से व्यक्ति, वस्तु, स्थान आदि के समूह अथवा समुदाय का बोध हो, उन्हें समूहवाचक संज्ञा कहते हैं, जैसे कक्षा, संघ, गाँव सेना, टीम आदि।
भाववाचक संज्ञा
भाववाचकः- जिन शब्दों से व्यक्ति, वस्तु आदि के धर्म, गुण, भाव, दशा आदि का बोध होता हो, उन्हें भाववाचक संज्ञा कहा जाता है,
जैसे:-
1. मित्रता, सज्जनता, शत्रुता आदि गुण-दोष हैं।
2. आनंद, क्रोध, श्रद्धा, भक्ति आदि भाव हैं।
3. बचपन, यौवन, बुढ़ापा आदि दशाएँ हैं।
प्रस्तुतकर्ता Education haryana @ जनवरी 06, 2024
0 टिप्पणियाँ


0 टिप्पणियाँ:
एक टिप्पणी भेजें
सदस्यता लें टिप्पणियाँ भेजें [Atom]
<< मुख्यपृष्ठ