Cabinate meeting
चंडीगढ़, 25 अगस्त - हरियाणा सरकार ने
सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृति की आयु
को 58 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष और चतुर्थ श्रेणी के
कर्मचारियों की सेवानिवृति आयु को 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने
का निर्णय लिया है। इसके अतिरिक्त, सरकार ने
सरकारी नौकरी के लिये आवेदन करने
की अधिकतम आयु सीमा को दो वर्ष बढ़ाने अर्थात 42
वर्ष करने का भी निर्णय लिया है।
इस आशय का निर्णय मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र सिंह
हुड्डा की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल
की बैठक में लिया गया।
अधिकतम आयु सीमा में वृद्घि करने का यह निर्णय जनसाधारण
की मांग के आधार पर लिया गया है क्योंकि यह महसूस
किया गया है कि सेवानिवृति की आयु के उपरांत
सरकारी कर्मचारियों को दो वर्ष के लिये पुन: नियुक्ति दिये जाने से
कर्मचारी की सेवानिवृति दो वर्ष के लिये रूक जाने
की संभावना है। इसके फलस्वरूप, बेरोज़गार लोगों के लिये
सरकारी नौकरियों के अवसर कम उपलब्ध होंगे।
अत:सभी श्रेणियों की सरकारी नौकरी में
प्रवेश के लिये अधिकतम आयु सीमा को 40 से बढ़ाकर 42 वर्ष
करने से बेरोज़गार लोगों को सरकारी नौकरी के लिये
आवेदन करने का समान अवसर प्रदान करना उनके हित में होगा।
क्रमांक - 2014
चंडीगढ़, 25 अगस्त - हरियाणा के
मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र सिंह
हुड्डा की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल
की बैठक में एक व्यापक हरियाणा सौर ऊर्जा नीति,
2014 को स्वीकृति प्रदान की गई। यह
नीति अधिसूचना जारी होने की तिथि से
लेकर 31 मार्च, 2017 तक प्रभावी रहेगी।
इस नीति का उद्देश्य सौर ऊर्जा परियोजना से जुड़ा मैगावाट स्तर
का ग्रिड, रूफटोप ग्रिड इंटरैक्टिव
एसपीवी प्रणाली, लघु
क्षमता की ग्रिड सौर ऊर्जा परियोजनाएं एवं उपकरण विकसित
करना, सौर थर्मल कोलेक्टरस को प्रोत्साहित करना, आईटीआई
एवं डिप्लोमा कोर्सों में सौर ऊर्जा संयंत्र/उपकरणों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम
शुरू करना, सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आदर्श गांव विकसित करना,
इंजीनियरिंग कॉलेजों में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास
को बढ़ावा देना और हरियाणा सौर ऊर्जा नीति के क्रियान्वयन के लिये
धन राशि सृजित करना है। नीति के तहत मीटरिंग
उपकरण स्थापित करने, बिजली उत्पन्न करने
की सुविधा तथा राज्य सरकार द्वारा प्रोत्साहन दिये जाने का प्रावधान
होगा।
राज्य सरकार प्रदेश में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के त्वरित विकास के लिए
हरेडा के शासी मंडल तथा महानिदेशक, अक्षय ऊर्जा विभाग एवं
हरेडा के नियंत्रण के तहत एक ग्रीन एनर्जी फंड
नामक एक पृथक कोष सृजित करेगी। धन राशि के उपयोग के लिये
दिशा निर्देश एवं नीतियां निर्धारित करने के लिये मुख्य सचिव परामर्श
कमेटी के अध्यक्ष होंगे तथा कोष के दैनिक संचालनों का अधिकार
महानिदेशक, हरेडा को सौंपा जायेगा। कमेटी में 11 सदस्य होंगे,
जिनमें वित्त, स्थानीय निकाय, बिजली, सिंचाई, कृषि,
अक्षय ऊर्जा, उद्योग, नगर एवं ग्राम आयोजन, पर्यावरण, वन विभाग के
सचिव और अक्षय ऊर्जा विभाग का महानिदेशक शामिल है।
ग्रीन एनर्जी फंड का उपयोग सौर ऊर्जा संयंत्रों/सौर
ऊर्जा आधारित उपकरणों की स्थापना एवं बढ़ावा देने के लिए मुख्य
मंत्री की स्वीकृति से राज्य वित्त
प्रोत्साहन देने के लिये किया जायेगा। डिस्कॉमस के सभी श्रेणियों के
उपभोक्तओं, कृषि उपभोक्ताओं को छोडक़र, पर सौर शुल्क लगाकर फंड के लिये
धनराशि एकत्रित की जायेगी। उपभोक्ताओं के मासिक
बिल में बिजली डयूटी के साथ सोलर शुल्क
लगाया जायेगा। दो पैसे प्रति यूनिट तक सोलर शुल्क लगाया जायेगा।
हरियाणा में एक साल में लगभग 320 दिन तक सूर्य का प्रकाश पूर्ण रूप से
रहता है इसलिए प्रदेश में सोलर रेडिएशन का स्तर बहुत ऊंचा है। इस
अप्रयुक्त एवं कभी न खत्म होने वाली सौर
क्षमता का दोहन करने से सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पन्न होगा और
कार्बनडाइऑक्साइड तथा दूसरी हानिकारक गैसों के उत्सर्जन
को भी कम किया जा सकेगा।
नीति के तहत, प्रदेश सौर अक्षय ऊर्जा खरीद
दायित्वों को पूरा करने के लिए एक मैगावाट से लेकर 10 मैगावाट क्षमता के
एसपीवी सौर ऊर्जा संयंत्र विकसित करेगा। यह
सुनिश्चित करने के हर संभव प्रयास किये जायेंगे कि अक्षय
खरीद दायित्वों के लिये बिजली वितरण
लाईसैंसी (डिस्कॉम) द्वारा आवश्यकता अनुसार
खरीदी जाने वाली समस्त सौर
ऊर्जा की खरीद प्रदेश में स्थित डेवेलपर्स से
की जाये। मार्च, 2017 तक हरेडा द्वारा दो चरणों में
एमवी स्केल ग्रिड से जुड़ी सौर
बिजली परियोजना स्थापित किये जाने को प्रोत्साहित किया जायेगा।
प्रत्येक चरण में हरियाणा बिजली विनियामक आयोग
द्वारा एसपीवी सौर ऊर्जा संयंत्रों के लिए निर्धारित
की गई दर पर पेशकश की गई अधिकतम छूट के
आधार पर रिवर्स बोली के माध्यम से 50 मैगावाट क्षमता का चयन
किया जायेगा। सौर ऊर्जा संयंत्र के लिए समस्त
बिजली की खरीद हरियाणा के डिस्कॉमस
द्वारा इस प्रकार निर्धारित दर पर की जायेगी।
प्रदेश जवाहर लाल नेहरू राष्टï्रीय सौर मिशन के तहत प्रदेश
में मैगावाट स्तरीय
एसपीवी तथा एकीकृत सौर ऊर्जा संयंत्र
स्थापित करने के लिये सहयोग देगा। हरियाणा प्रदेश में जवाहर लाल नेहरू
राष्टï्रीय सौर मिशन के तहत प्रथम चरण में भारतीय
अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी द्वारा अनुमोदित कुल 7.8 मैगावाट
क्षमता की आठ एसपीवी परियोजनाएं चालू
की गई हैं और वे सौर ऊर्जा की आपूर्ति कर
रही हैं। राज्य सरकार जवाहर लाल नेहरू राष्टï्रीय
सौर मिशन के आगामी चरणों में
भी भावी परियोजनाओं को सहयोग
देगी तथा ये परियोजनाएं नीति के अनुसार राज्य सरकार
द्वारा दिये जाने वाले प्रोत्साहनों के लिये पात्र होंगी।
प्रदेश में केप्टिव उपयोग या र्थड
पार्टी बिक्री या केन्द्रिय बिजली विनियामक
आयोग द्वारा अपनी अधिसूचना संख्या एल-1/12/2010-
सीइआरसी, दिनांक 14 जनवरी, 2010 के
माध्यम से जारी किये गये दिशा निर्देशों तथा बाद में किये गये
संशोधनों के अनुसार अक्षय ऊर्जा प्रमाणपत्र विधि के तहत डिस्कॉम
को औसत बिजली खरीद लागत पर सौर
ऊर्जा की बिक्री करने के लिये स्वतंत्र
बिजली उत्पादकों को सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिये
प्रोत्साहित एवं सुविधा प्रदान की जायेगी।
प्रदेश में बंजर पंचायत भूमि पर 500 मैगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र
स्थापित करने की संभावनाओं का भी पता लगाया जायेगा।
विभाग द्वारा ग्राम एवं पंचायत विभाग के परामर्श से ऐसे उपयुक्त
स्थलों की पहचान की जायेगी। अपने
कब्जे वाली भूमि को पट्टïे पर देने के इच्छुक पंचायतों को 25 वर्ष
तक के लिए वर्तमान राज्य नीति के अनुसार
अदायगी की जायेगी।
हरियाणा बिजली विनियामक आयोग
द्वारा एसपीवी सौर ऊर्जा संयंत्रों के लिए निर्धारित
की गई दर पर पेशकश की गई अधिकतम छूट के
आधार पर रिवर्स बोली के माध्यम से बोलीदाता का चयन
किया जायेगा। सौर ऊर्जा संयंत्र के लिए समस्त
बिजली की खरीद हरियाणा के डिस्कॉमस
द्वारा इस प्रकार निर्धारित दर पर की जायेगी।
नहरों पर मैगावाट स्तर के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने
की संभावनाओं का पता लगाया जायेगा। सिंचाई विभाग के परामर्श से
कैनाल ओवर हैडस पर स्थल की पहचान
की जायेगी जिसके लिये कोई शुल्क देय
नहीं होगा। सौर ऊर्जा संयंत्र की समस्त
बिजली हरियाणा के डिस्कॉमस द्वारा इस प्रकार निर्धारित दर पर
की जायेगी।
प्रदेश में उद्योगों, सार्वजनिक एवं निजी संस्थानों, स्कूलों, कॉलेजों,
वाणिज्यिक संस्थानों/प्रतिष्ठïानों, धर्मार्थ न्यास भवनों, अस्पताओं एवं
रिहायशी भवनों को अपने केप्टिव उपयोग
तथा बिजली निगमों को बिजली की बिक्री करने
के लिये अपनी छतों पर कम क्षमता के रूफटॉप ग्रिड से जुड़े सौर
ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने को प्रोत्साहित किया जायेगा। एमएनआरई योजनाओं
के तहत सौर परियोजनाओं को उपलब्ध 30 प्रतिशत
पूंजी सबसिडी के अतिरिक्त राज्य डिस्कॉमस द्वारा दर
में निर्धारित फीड पर उत्पन्न सौर
ऊर्जा की खरीद की जायेगी।
इस नीति की कार्यावधि के दौरान प्रदेश में कुल 50
मैगावाट क्षमता के रूफटॉप ग्रिड से जुड़े सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किये जायेंगे।
हरेडा प्रत्येक जिला मुख्यालय पर सार्वजनिक भवनों के एक क्लस्टर
की पहचान करेगा। प्रत्येक क्लस्टर की कुल
क्षमता एक मैगावाट होगी और एक भवन पर सौर ऊर्जा संयंत्र
की अधिकतम क्षमता 500 मैगावाट से अधिक
नहीं होगी। हरियाणा बिजली विनियामक
आयोग द्वारा छूट या छूट के साथ रूफटॉप एसपीवी सौर
ऊर्जा संयंत्रों के लिए निर्धारित की गई दर पर पेशकश
की गई अधिकतम छूट के आधार पर रिवर्स बोली के
माध्यम से बोलीदाता का चयन किया जायेगा। इसीप्रकार,
समस्त शहर, जोकि संख्या में 10 हैं, को स्वतंत्र
बिजली उत्पादकों को एक क्लस्टर के रूप में पेश किया जायेगा।
शहर में भवनों की पहचान
आईपीपी द्वारा की जायेगी और
प्रत्येक क्लस्टर की कुल क्षमता 500 से 1000 किलोवॉट
होगी। रूफटॉप के किराये का निर्णय रूफटॉप के मालिक
तथा आईपीपी द्वारा आपसी निर्णय से
लिया जायेगा। हरियाणा बिजली विनियामक आयोग द्वारा छूट या छूट के
साथ रूफटॉप एसपीवी सौर ऊर्जा संयंत्रों के लिए निर्धारित
की गई दर पर पेशकश की गई अधिकतम छूट के
आधार पर रिवर्स बोली के माध्यम से बोलीदाता का चयन
किया जायेगा।
भवन मालिकों को निवल मीटरिंग आधार पर अपने खर्चे पर
छोटी क्षमता के रूफटॉप सौर ऊर्जा संयंत्र (5 किलोवॉट से 100
किलोवॉट तक)स्थापित करने के लिये प्रोत्साहित किया जायेगा। उत्पन्न
बिजली का उपयोग भवन मालिक द्वारा सीमित उपयोग के
लिए किया जायेगा और यदि अतिरिक्त बिजली उत्पन्न
की जाती है तो उसकी खरीद
निर्धारित दर पर डिस्कॉमस द्वारा की जायेगी। राज्य
सरकार द्वारा लाभानुभोगियों को जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन
के तहत केन्द्रीय अक्षय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा उपलब्ध करवाये
जा रहे वित्तीय प्रोत्साहन सहित
प्रणाली की लागत के 40 प्रतिशत की दर
से वित्तीय सहायता दी जायेगी।
रूफटॉप ग्रिड इंटरऐक्टिव सौर ऊर्जा संयंत्रों को प्रोत्साहित करने के लिये
हरियाणा बिजली विनियामक आयोग द्वारा एमएनआरई
सबसिडी के साथ और बिना रूफटॉपस के लिये दर में
फीड निर्धारित की जायेगी।
ग्रिड संयोजिता के लिए, बिजली मंत्रालय/
एच.ई.आर.सी द्वारा अधिसूचित केन्द्रीय विद्युत
प्राधिकरण (सी.ई.ए.) (वितरित उत्पादन
संसाधनों की संयोजिता के लिए
तकनीकी मानक) अधिनियम स्वीकार किए
जाएंगें। सोलर स्थापना के निकट ग्रिड संयोजिता संबद्ध पावर डिसकॉम्स
द्वारा उपलब्ध करवाई जाएगी।
निवेशक समुदाय के हितों के लिए केन्द्रीय नव एवं
नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एम.एन.आर.ई) सौर
उर्जा के ऑफ-ग्रिड अनुप्रयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से व्यवहार्य
बिजनेस मॉडलस का समर्थन कर रही है। इस योजना के तहत
केन्द्रीय नव एवं नवीकरणीय
ऊर्जा मंत्रालय सीमित उपयोग के लिए सौर
ऊर्जा प्लांटों (बैटरी बैकअप के साथ या इसके बिना)
तथा उपकरणों यथा-सोलर लालटेन, एस.पी.वी. होम
लाइटिंग सिस्टम, एलईडी आधारित
एसपीवी स्ट्रीट लाईटिंग सिस्टम, सौलर
कुकर तथा सोलर इंवर्टर की स्थापना के लिए केन्द्रीय
वित्तीय सहायता उपलब्ध करवा रही है। राज्य
सरकार इन छोटे सौर ऊर्जा प्लांटों/उपकरणों को बढ़ावा देने के लिए
लाभार्थियों को (जेएनएनएसएम के तहत नवीकरणीय
ऊर्जा मंत्रालय द्वारा उपलब्ध करवाए जा रहे वित्तीय प्रोत्साहन
समेत, यदि मंत्रालय द्वारा 30 प्रतिशत वित्तीय सहायता उपलब्ध
करवाई जाती है तो अतिरिक्त 10 प्रतिशत
सहायता ग्रीन एनर्जी फण्ड से उपलब्ध करवाई
जाएगी) सिस्टम की लागत के 40 प्रतिशत
की दर पर वित्तीय सहायता उपलब्ध
करवाएगी। अनुसूचित
जातियों तथा गरीबी रेखा से नीचे के
लाभार्थियों के मामले में सिस्टम की लागत के 80 प्रतिशत
की दर पर (जेएनएनएसएम के तहत भारत सरकार के
नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा उपलब्ध करवाए
जा रहे वित्तीय प्रोत्साहन समेत, यदि मंत्रालय द्वारा 30 प्रतिशत
वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जाती है
तो अतिरिक्त 50 प्रतिशत सहायता ग्रीन
एनर्जी फण्ड से उपलब्ध करवाई जाएगी)
वित्तीय प्रोत्साहन उपलब्ध करवाया जाएगा। सोलर वाटर पम्पिंग
सिस्टम जैसे सौर आधारित कृषि उपकरणों के लिए लाभार्थियों को सिस्टम
की लागत के 60 प्रतिशत की दर पर (जेएनएनएसएम
के तहत नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा उपलब्ध
करवाए जा रहे वित्तीय प्रोत्साहन समेत, यदि मंत्रालय द्वारा 30
प्रतिशत वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जाती है
तो अतिरिक्त 30 प्रतिशत सहायता ग्रीन
एनर्जी फण्ड से उपलब्ध करवाई जाएगी)
वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी। इस
श्रेणी के तहत राज्य सरकार इस
नीति की अवधि के दौरान कुल 35 मैगावाट क्षमता के
ऑफ गेड सोलर पावर प्लांट तथा उपकरणों को बढ़ावा देगी।
जल तापन अनुप्रयोगों में बिजली तथा अन्य परम्परागत
ईंधनों की बचत के लिए राज्य सरकार सोलर वाटर हीटिंग
सिस्टम के प्रयोग को लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से एक योजना क्रियान्वित कर
रही है। जल तापन अनुप्रयोग के लिए सोलर वाटर
हीटिंग एक प्रौद्योगिकी-आर्थिक रूप से व्यावहारिक
विकल्प है। इन प्रणालियों के लिए, फ्लैट प्लेट कलेक्टर सिस्टम
तथा इवेक्वेटिड ट्यूब कलेक्टर सिस्टम के मामले में केन्द्रीय
वित्तीय सहायता औद्योगिक भवनों, सरकारी/
निजी अस्पतालों तथा नर्सिंग होम्स,होटलों, रिजोर्टस, मोटल,बैंकट
हाल, कैटरिंग यूनिटस, औद्योगिक कंटीनों,आवासीय
भवनों, शैक्षणिक संस्थानों में छात्रावासों/निजी छात्रावासों,
परीक्षण प्रयोगशालाओं/शैक्षणिक संस्थानों/
अस्पतालों की प्रयोगशालाओं, पुलिस, अर्ध-सैनिक बलों और
जेलों की बैरकों, निजी /
सरकारी अतिथि गृहों, सरकारी पर्यटन होटलों, डाक
बंगला, सरकेट हाऊस तथा रेलवे के रिटायरिंग रूम,स्वास्थ्य केन्द्रो, खेल
परिसरों, तरणतालों और सामाजिक क्षेत्र की ईकाइयों यथा अनाथालयों,
मूक एवं बधिर संस्थानों जैसी सम्भावित श्रेणियों में उपलब्ध है।
राज्य सरकार जेएनएनएसएम के तहत नवीकरणीय
ऊर्जा मंत्रालय द्वारा उपलब्ध करवाए जा रहे वित्तीय प्रोत्साहन
समेत लाभार्थियों को सिस्टम की लागत के 40 प्रतिशत
की दर पर वित्तीय प्रोत्साहन उपलब्ध करवाकर
एसडब्ल्यूएचएस के 50,000 वर्ग मीटर के कलेक्टर
एरिया को प्रोत्साहित करेगी। अनुसूचित
जातियों तथा गरीबी रेखा के नीचे के
लाभार्थियों से सम्बन्धित आवासीय भवनों के मामले में सिस्टम
की लागत के 80 प्रतिशत की दर पर (जेएनएनएसएम
के तहत नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा उपलब्ध
करवाए जा रहे वित्तीय प्रोत्साहन समेत, यदि मंत्रालय द्वारा 30
प्रतिशत वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जाती है
तो अतिरिक्त 50 प्रतिशत सहायता ग्रीन
एनर्जी फण्ड से उपलब्ध करवाई जाएगी)
वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी।
राज्य सरकार लाभार्थियों को (जेएनएनएसएम के तहत
नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा उपलब्ध करवाए
जा रहे वित्तीय प्रोत्साहन समेत, यदि मंत्रालय द्वारा 30 प्रतिशत
वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जाती है
तो अतिरिक्त 10 प्रतिशत सहायता राज्य कोष से उपलब्ध करवाई
जाएगी) सिस्टम की लागत के 40 प्रतिशत
की दर पर वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाकर इन
सोलर स्टीम प्रणालियों के 5000 वर्ग मीटर के
कलेक्टर एरिया को प्रोत्साहित करेगी।
इस नीति के तहत हरेडा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में सौर
ऊर्जा विद्युत संयंत्र/ उपकरणों पर पाठ्यक्रम/प्रशिक्षण कार्यक्रम
तथा डिप्लोमा कोर्स शुरू करने के लिए
तकनीकी शिक्षा विभाग/औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग
के परामर्श से कदम उठाएगा। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में सौर
ऊर्जा विद्युत संयंत्रों/उपकरणों की मरम्मत तथा रख-रखाव पर
अलग से कोर्स शुरू किया जाएगा।
राज्य के प्रत्येक जिले में एक गांव को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आदर्श गांव के
तौर पर विकसित किया जाएगा। आदर्श गांव में सभी परिवारों को एक
किलोवाट क्षमता का रूफ टॉप सोलर पावर प्लांट
तथा 200एलपीडी क्षमता का सोलर वाटर
हीटिंग सिस्टम उपलब्ध करवाया जाएगा। प्रत्येक आदर्श गांव में
20 एलईडी आधारित सोलर स्ट्रीट लाईटें स्थापित
की जाएंगी, इसके लिए ग्रीन
एनर्जी फण्ड से सम्पूर्ण परियोजना की लागत के 80
प्रतिशत की दर पर वित्तीय प्रोत्साहन
(जेएनएनएसएम के तहत नवीकरणीय
ऊर्जा मंत्रालय द्वारा उपलब्ध करवाए जा रहे वित्तीय प्रोत्साहन
समेत, यदि मंत्रालय द्वारा 30 प्रतिशत वित्तीय सहायता उपलब्ध
करवाई जाती है तो अतिरिक्त 50 प्रतिशत
सहायता ग्रीन एनर्जी फण्ड से उपलब्ध करवाई
जाएगी) उपलब्ध करवाया जाएगा। परियोजना लागत का शेष 20
प्रतिशत सम्बद्ध पंचायतों द्वारा वहन किया जाएगा।
हरेडा राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों को वित्तीय
प्रोत्साहन उपलब्ध करवाकर सौर ऊर्जा के क्षेत्र मेें अनुसंधान एवं विकास
कार्यक्रम को भी प्रोत्साहित करेगा। इंजीनियरिंग
कॉलेजों से 20 लाख रुपये तक की पांच परियोजनाएं आमंत्रित
की जाएंगी और वित्तीय प्रोत्साहनों के
लिए चयन हरेडा के नियंत्रक बोर्ड द्वारा किया जाएगा।
इकाई द्वारा अपने खर्च पर प्रदेश के बिजली निगमों/
एचइआरसी ग्रिड कोड/सीइए
मानकों की विशिष्टïता के अनुसार स्थल पर
बिजली उत्पन्न करने एवं बिक्री करने के लिये
मीटरिंग उपकरण लगाये जायेंगे। इन
उपकरणों की टेस्टिंग बिजली निगमों द्वारा इकाई के खर्च
पर की जायेगी। कम्पनी के
मीटरिंग उपकरण की टेस्टिंग
बिजली निगमों द्वारा कम्पनी के खर्च पर
की जायेगी।
रूफटॉप ग्रिड इंटरएक्टिव
एसपीवी प्रणाली के लिये
बिजली उत्पादन के सभी प्रबंध
बिजली उत्पादकों द्वारा एचइआरसी द्वारा निर्धारित
तकनीकी विशिष्टïता, दिशा-निर्देश एवं विनियमों के
अनुसार किये जायेंगे। सौर बिजली उत्पन्न के सभी नई
परियोजनाओं को राज्य की उद्योग नीति के अनुसार
उद्योग माना जायेगा और उद्योग नीति के तहत औद्योगिक
इकाइयों को उपलब्ध करवाये जा रहे सभी प्रोत्साहन सौर
बिजली उत्पादकों/ इकाइयों को उपलब्ध होंगे।
हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण
निगम, उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम
तथा लाइसैंसी पात्र निर्माताओं द्वारा उत्पन्न सौर
बिजली के बैंक की अनुमति देंगे। बैंकिग सुविधा एक
वर्ष के लिये होगी। आईपीपी तथा संबंधित
बिजली निगम या लाईसैंसी के बीच
हस्ताक्षरित किया जाने वाला बिजली खरीद
समझौता कम से कम 25 वर्ष के लिये वैध होगा। इस अवधि के दौरान समझौते
पर पुन: बातचीत की जायेगी।
आईपीपी/ऑफ ग्रिड बिजली उत्पादक/
एसपीवी उपकरणों के प्रयोक्ताओं
को नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा समय समय पर
निर्धारित राष्टï्रीय एवं अंतर्राष्टï्रीय मानकों का कड़ाई
से पालन करना होगा।
क्रमांक - 2014
चंडीगढ़, 25 अगस्त - हरियाणा के
मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र सिंह
हुड्डा की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल
की बैठक में टोल प्वाइंट टीपी-28-भट्टïू
लूदेसर-जमाल रोड, जो कि राजस्थान सीमा तक है, को बंद करने
का निर्णय लिया गया।
इस टोल प्वाइंट को बंद करने का निर्णय इस लिये लिया गया क्योंकि इस प्वाइंट पर
औसत दैनिक संग्रहण मात्र 9241 रुपये था जो कि लगभग 33,72,960 रुपये
वार्षिक बनता है।
यहां यह उल्लेखनीय होगा कि इससे पहले
भी सरकार ने ऐसे 10 टोलज़ को बंद करने का निर्णय
लिया था क्योंकि उनका संग्रहण 50 लाख रुपये वार्षिक से कम था।
क्रमांक - 2014
चंडीगढ़, 25 अगस्त - हरियाणा के
मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र सिंह
हुड्डा की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल
की बैठक में मुख्य अधिनियम की धारा (1)
की उप धारा 3 को हटाकर और इसी अधिनियम में
धारा 49 को शामिल करके 2008 के हरियाणा राज्य
तकनीकी शिक्षा बोर्ड अधिनियम 19 में संशोधन
को स्वीकृति प्रदान की गई।
अधिनियम को मान्यता प्रदान करने के लिये यह संशोधन किया गया है जो 6 मई,
2008 से लागू माना जायेगा तथा किसी न्यायालय, ट्रिब्यूनल
या प्राधिकरण के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश के
बावजूद, सरकार या बोर्ड द्वारा अधिनियम के तहत की गई
सभी कार्यवाहियों, किये गये कार्यों, बनाये गये नियमों,
जारी की गई अधिसूचनाओं को इस अधिनियम के तहत
वैध रूप से लिया गया, किया गया एवं जारी किया गया माना जायेगा, जैसे
कि यह नियम लागू था और इसे किसी न्यायालय में
या किसी प्राधिकरण के समक्ष
किसी भी आधार वापिस लेने का अनुरोध
नहीं किया जा सकेगा।
क्रमांक - 2014
चंडीगढ़, 25 अगस्त - हरियाणा के
मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र सिंह
हुड्डा की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल
की बैठक में पैंशन की गणना हेतु अहर्क
सेवा अवधि को 28 वर्ष से घटाकर 20 वर्ष करने के प्रस्ताव
को स्वीकृति प्रदान की गई।
क्रमांक - 2014
चंडीगढ़, 25 अगस्त - हरियाणा के
मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र सिंह
हुड्डा की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल
की बैठक में समान श्रेणी के विभागों में चालक के पद
के लिये सेवा नियमों में संशोधन करने के मुख्य सचिव के प्रस्ताव
को स्वीकृति प्रदान की गई।
संशोधन के अनुसार चालक के पद, चाहे वे
सीधी भर्ती द्वारा नियुक्त
हों या पदोन्नति द्वारा, का वेतनमान एक समान होगा। चालक के पद पर
पदोन्नति के लिये क र्मचारी की अहर्क आयु में कोई
बदलाव नहीं होगा जैसाकि सरकार के पत्र क्रमांक 25/16/
2005-4जीएस॥, दिनांक 13 मई, 2005 में निर्णय लिया गया।
निर्णय लिया गया कि सीधी भर्ती के मामले
में चालक के पद के लिये आवेदन करने वाले आवदेक का ड्राइविंग टैस्ट
हमेशा की भांति हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग
द्वारा लिया जायेगा और पदोन्नति या अनुबंध के माध्यम से नियुक्ति के मामले में
संबंधित विभाग द्वारा ड्राइविंग टेस्ट लिया जायेगा। यह भी निर्णय
लिया गया कि सीधी भर्ती के मामले में
शैक्षणिक योग्यता हिंदी या संस्कृत के साथ मैट्रिक
होगी, आवेदक के पास हल्के/भारी वाहन चलाने
का कम से कम तीन वर्ष पुराना वैध ड्राईविंग लाईसैंस होना चाहिए,
उसने ड्राईविंग टेस्ट पास किया हो और वह रंगांध न हो। बहरहाल,
पदोन्नति के मामले में उम्मीदवार ने हिंदी या संस्कृत
के साथ मैट्रिक पास की हो, श्रेणी तीन/
चार के पद पर कार्य करने का तीन वर्ष का अनुभव हो, हल्के/
भारी वाहन चलाने का कम से कम तीन वर्ष पुराना वैध
ड्राईविंग लाईसैंस होना चाहिए, उसने ड्राईविंग टेस्ट पास किया हो और वह
रंगांध न हो।
क्रमांक - 2014
चंडीगढ़, 25 अगस्त - हरियाणा के
मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र सिंह
हुड्डा की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल
की बैठक में हरियाणा राज्य सहकारिता (गु्रप ख) सेवा नियम,
1997 तथा हरियाणा वास्तुकार सेवा गु्रप ख नियम, 1976 में संशोधन
को स्वीकृति प्रदान की गई।
क्रमांक - 2014
चंडीगढ़, 25 अगस्त - हरियाणा के
मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र सिंह
हुड्डा की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल
की बैठक में हरियाणा राज्य स्कूल शिक्षा काडर(ग्रुप ख)
सेवा नियम, 2012; मेवात जिला स्कूल शिक्षा (ग्रुप ख) सेवा नियम, 2012;
हरियाणा स्कूल शिक्षा (ग्रुप ग) राज्य काडर सेवा नियम, 2012; मेवात
जिला स्कूल शिक्षा (ग्रुप ग) सेवा नियम, 2012 तथा हरियाणा प्राथमिक
शिक्षा (ग्रुप ग) जिला काडर सेवा नियम, 2012 में संशोधन करने स्कूल
शिक्षा विभाग के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई।
हरियाणा राज्य स्कूल शिक्षा काडर(ग्रुप ख) सेवा नियम, 2012 और मेवात
जिला स्कूल शिक्षा (ग्रुप ख) सेवा नियम, 2012 के अनुसार जिन
अध्यापकों को चार वर्ष का अध्यापन अनुभव है और जिन्होंने
हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा या राज्य शिक्षक
पात्रता परीक्षा पास की हुई है और जिनके पास
बीएड की शैक्षणिक योग्यता नहीं है
उन्हें सेवा नियम 1998 के तहत पहली अप्रैल, 2015 तक
बीएड और हरियाणा शिक्षक
पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण
करनी होगी। न्यायालयों में विभिन्न मुकद्दमों के
मद्देनजर फरवरी, 2014 में कुछ विषयों के
पीजीटी नियुक्त किये गये थे और
हरियाणा स्कूल शिक्षक चयन बोर्ड द्वारा की गई सिफारिशों के
आधार पर पीजीटी नियुक्त करने
की प्रक्रिया चल रही है। अत: इसके दृष्टिïगत
नियमों में किये गये संशोधन के अनुसार
पीजीटी के पदों पर नियुक्त
अध्यापकों को पहली अप्रैल, 2018 तक बीएड
या हरियाणा शिक्षक पात्रता परीक्षा की शैक्षणिक
योग्यता प्राप्त करनी होगी।
इसीप्रकार, प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति हाई स्कूल के
हैडमास्ट या पीजीटी अध्यापकों में से
33:67 के अनुपात में की जाती है।
पीजीटी के स्वीकृत पद
33,000 हैं और इस समय 15,000 कार्यरत हैं। हाई स्कूल हैडमास्टर
के स्वीकृत पद 1500 हैं और इस समय 1300 हाई स्कूल
हैडमास्टर कार्यरत हैं। इस प्रकार्र,
पीजीटी की संख्या बढ़
रही है और हाई स्कूल हैडमास्टरस
की संख्या स्थिर है। इसलिए मंत्रिमंडल ने 33:67 के अनुपात
को 20:80 करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान
की है।
मंत्रिमंडल ने जीवविज्ञान के
पीजीटीज़ की शैक्षणिक
योग्यता में भी बबली बनाम हरियाणा प्रदेश दिनांक 4
दिसम्बर, 2012 शीर्षक के तहत 2012 की सिविल
रिट पिटिशन संख्या 13125 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये
स्पष्टïीकरण के मद्देनजर सुधार किया है।
मंत्रिमंडल ने शारीरिक शिक्षा में
पीजीटी के पद के लिये शैक्षणिक
योग्यता में संशोधन करने का भी निर्णय लिया है।
पीजीटी शारीरिक
शिक्षा की शैक्षणिक योग्यता शारीरिक शिक्षा में एमए
तथा बीएड है। लेकिन अब यह संशोधन किया गया है कि यह
योग्यता बीएड की बजाय शारीरिक शिक्षा में
एमए के साथ-साथ बीपीएड
या डीपीएड होगी।
शारीरिक शिक्षा में टीजीटी के
लिये प्राथमिक स्कूल हैड मास्टर के पद पर पदोन्नति के कोई अवसर
नहीं थे। इसलिये शारीरिक शिक्षा के
टीजीटी के लिये भी प्राथमिक
स्कूल हैड मास्टर के पद पर पदोन्नति देने के लिये आवश्यक संशोधन करने
का निर्णय लिया गया है।
अध्यापकों की विभिन्न श्रेणियां जिनमें प्रधानाचार्य, वरिष्ठï माध्यमिक
स्कूल; हैड मास्टर, उच्च स्कूल; प्राथमिक स्कूल हैडमास्टर;
पीजीटीज़;
टीजीटी तथा प्राथमिक टीचरज़
शामिल हैं, के सेवा नियम 11 अप्रैल, 2012 में अधिसूचित किये गये थे और
तत्पश्चात 6 जून, 2012 और 2 जुलाई, 2012 को अधिसूचनाएं
जारी कर इनमें कुछ और संशोधन किये गये थे। बहरहाल, इन
नियमोंम में कुछ विसंगतियां रह गई थी जिन्हें दूर करने के लिये
संशोधन किया जाना अपेक्षित है।
क्रमांक - 2014
चंडीगढ़, 25 अगस्त-
हरियाणा की शिक्षा मंत्री श्रीमती गीता भुक्कल
ने हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम तथा पिछड़े वर्ग एवं आर्थिक
रूप से कमजोर वर्ग कल्याण निगम से अनुसूचित जातियों तथा पिछड़े वर्गों के
सदस्यों द्वारा लिए गए 154 करोड़ रुपये के ऋण माफ करने के लिए
मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा का आभार
जताया है।
श्रीमती भुक्कल ने कहा कि यह एक चिरलंबित मांग
थी और इससे राज्य के लगभग 1.25 लाख लोगों को लाभ होगा।
उन्होंने वृद्धावस्था सम्मान भत्ता और अन्य सामाजिक सुरक्षा पैंशन एक
हजार रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह करने
की घोषणा करने के लिए
भी मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया। उन्होंने
कहा कि केवल कांग्रेस पार्टी ही समाज के
सभी वर्गों से जुड़े लोगों का भला कर सकती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार द्वारा सभी वर्गों के हित में
निर्णय लिए गए हैं और भविष्य में भी लिये जाते रहेंगे।
शिक्षा मंत्री ने किसानों, कर्मचारियों और महिलाओं के लिए विभिन्न
प्रोत्साहनों की घोषणा करने के लिए
भी मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया।
सूजसविह-2014
चण्डीगढ़, 25 अगस्त - हरियाणा सरकार ने पंजाब एवं
हरियाणा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीश
श्री इकबाल सिंह को पांच वर्ष की अवधि के लिए
गुरुद्वारा चु नाव का आयुक्त नियुक्त किया है।
सूजसविह-2014
चण्डीगढ़, 25 अगस्त - गुरू जम्भेश्वर विज्ञान एवं
प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, हिसार ने विभिन्न
विषयों का परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया है।
परीक्षा नियन्त्रक हरनाम सिंह ने
बताया कि एमएससी (इन्वायर्नमैंट साईंस) तृतीय
सेमेस्टर (मेन) बैच 2012, एमएससी (मैथेमेटिक्स) चतुर्थ
सेमेस्टर (रीअपीयर) बैच 2011, बीटैक
(ईईई) प्रथम सेमेस्टर (रीअपीयर) बैच 2011,
बीटैक (आईटी) पंचम सेमेस्टर (मेन),
बीटैक (सिविल इंजीनियरिंग) पंचम सेमेस्टर (मेन),
बीटैक (बायोमेडिकल इंजीनियरिंग) तृतीय
सेमेस्टर (रीअपीयर) बैच 2011, बीटैक
(पैकेजिंग) आठवां सेमेस्टर (रीअपीयर) बैच 2008
तथा बी.फार्मेसी पंचम सेमेस्टर (मेन) बैच 2011
का परीक्षा परिणाम घोषित किया गया है।
सूजसविह-2014
चण्डीगढ़, 25 अगस्त - हरियाणा के राज्यपाल प्रो० कप्तान सिंह
सोलंकी, जो राज्य के विश्वविद्यालयों के
कुलाधिपति भी हैं, ने डॉ. वी.के.जैन को पण्डित
भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक
का प्रतिकुलपति नियुक्त किया है।
डॉ.वी.के.जैन जानेमाने चर्म रोग विशेषज्ञ और
पीजीआईएमएस के डीन हैं। उन्होंने
आज प्रतिकुलपति के पद का कार्यभार सम्भाल लिया है।
एमडी की डिग्री हासिल करने के बाद डॉ.
जैन ने इस संस्थान में रजिस्ट्रार, लैक्चरार, रीडर, एसोसिएट
प्रोफेशर, आचार्य एवं विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ आचार्य एवं विभागाध्यक्ष व
डीन पदों पर भी कार्य किया। उन्हें 25 वर्ष
का अध्यापन का अनुभव है। उनके राष्ट्रीय व
अंर्तराष्ट्रीय जरनलों में 115 शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं।
उन्होंने मेनुअल ऑफ स्कीन डीसिज फोर
अंडरग्रेजुएट विषय पर एक पुस्तक भी लिखी है।
सूजसविह-2014


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